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रेखा चमोली की कविताएँ

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इधर के जिन कवियों की कविता में उतरोत्तर विकास दिखायी पड़ता है उसमें रेखा चमोली का नाम प्रमुख रूप से लिया जा सकता है. रेखा की नयी कविताएँ इसकी एक बानगी हैं जिनमें काव्यत्व के साथ उनकी दृष्टि सम्पन्नता सहज ही देखी जा सकती है. आज जब जीवन की दुश्वारियां बढीं हैं. हत्या और आत्महत्या की खबरें आम हैं ऐसे में रेखा की ‘आत्महत्या माय फुट’ कविता हमें आश्वस्त करती है कि (स्वयं रेखा चमोली के ही शब्दों में कहें तो) ‘जीना कितना भी दुश्वार क्यों न हो/ मरने से थोड़ा सा हसीन तो होता ही है’ जीवन हमेशा बड़ा होता है. यह अलग बात है कि आज इसी जीवन के लिए जाति, धर्म, भाषा आदि के नाम पर खतरे पैदा किए जा रहे हैं. ऐसे में चंडीदास की पंक्ति याद आती है ‘सबसे ऊपर मनुष्य धर्म है/ उसके ऊपर कुछ भी नहीं.’ आज पहली बार पर रेखा चमोली की कुछ नयी और तारो-ताजा कविताएँ प्रस्तुत हैं. तो आइए आज पढ़ते हैं रेखा चमोली की कविताएँ.

रेखा चमोली की कविताएँ

आत्महत्या माय फुट

बहुत बार मन करता है तेज स्कूटर चलाते हुए, किसी पहाड़ी मोड पर कर लूं आँखें  बंद कुछेक मिनट की बात होगी और किस्सा खत्म
या फिर कूद जाऊं छप से नदी के गहरे हरे नीले ठंडे पानी में ज…

सईद अय्यूब की कहानी 'मौलाना मुफ्ती'

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मनुष्य के विकास क्रम में जब भी धर्म अस्तित्व में आया होगा तो उसकी परिकल्पना में एक बेहतर समाज का निर्माण ही रहा होगालेकिन समय बीतने के साथ हुआ ठीक इसका उल्टाधर्म अपने ही पंथ के पुरोहितों और कट्टरपंथियों के हाथों का महज औजार बन कर रह गयाआज भी कई बार ऐसा होता है कि धार्मिक परम्पराएँ हमें ऐसी दिक्कतों में डाल देती हैं जिससे न केवल परिवार या समाज बिखर जाता है बल्कि जीवन भी समाप्त हो जाता है जबकि मनुष्य के जीवन से बढ़ कर कुछ भी नहीं हैकिसी भी देश काल का साहित्य अपने समय की उन विसंगतियों को उजागर करने का काम करता है जो मानव विरोधी हैंयुवा कहानीकार सईद अय्यूब ने अपनी कहानी मौलाना मुफ्तीके माध्यम से इस विसंगति को उगाजर करने का प्रयास किया हैतो आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं सईद अय्यूब की कहानी मौलाना मुफ्ती

मौलाना मुफ़्ती
सईद अय्यूब