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ज्योति चावला का आलेख - 'ऐ लड़की' : अपनी महीन बुनावट में स्त्री विमर्श का तरल दस्तावेज़

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कृष्णा सोबती हिंदी की जानी-पहचानी वह रचनाकार हैं, जिन्होंने अपने लेखन से हिंदी के कथा साहित्य और कथा-भाषा को एक अलग स्वरुप और धार प्रदान किया है। विषयों के चुनाव से ले कर उसके ट्रीटमेंट तक कृष्णा जी की रचनात्मकता स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। कृष्णा जी का उपन्यास 'ऐ लड़की' एक क्लासिकल उपन्यास है जिसके कथ्य और स्वरुप पर पर्याप्त चर्चाएं हुई हैं और आगे भी यह क्रम चलता रहेगा। हाल ही में कृष्णा जी को वर्ष २०१७ का ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया है। सच कहें तो ज्ञानपीठ कृष्णा जी को पुरस्कार दे कर खुद गौरन्वान्वित हुआ है। चर्चित कवयित्री और कहानीकार ज्योति चावला ने कृष्णा जी के उपन्यास 'ऐ लड़की' पर एक सुविचारित आलेख लिखा है जिसे हम पहली बार पर प्रस्तुत कर रहे हैं। तो आइए  आज पहली बार पर पढ़ते हैं ज्योति चावला का आलेख - 'ऐ लड़की' : अपनी महीन बुनावट में स्त्री विमर्श का तरल दस्तावेज़।   

'ऐ लड़की' : अपनी महीन बुनावट में स्त्री विमर्श का तरल दस्तावेज़

(कृष्णा सोबती के उपन्यास 'ऐ लड़की' पर एक लेख)


ज्योति चावला


कृष्णा सोबती की एक रचना है – ‘ऐ लड़की’। शीर्षक से ही अंदा…