ध्रुव हर्ष




ध्रुव हर्ष का जन्म उत्तर प्रदेश के गोंडा  जिले  के मनकापुर के बनकसिया  नामक गाँव में १५ जनवरी 1989 को हुआ.  इलाहाबाद  विश्वविद्यालय से अंग्रेजी से परास्नातक करने के बाद अभी- अभी शोध के लिए हुई संयुक्त प्रवेश  
परीक्षा पास की है. ध्रुव हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी में भी कविताये लिखते हैं. इनकी कविताओं में उस प्रेम का आभास दिखाई पडता  है जिसकी तरफ युवा मन सहज ही आकृष्ट होता  है लेकिन वह हकीकतों से भी अंजान नहीं है कि उसके प्रेम को ये समाज सहज स्वीकृति देने वाला नहीं है. फिर भी उसके पास एक मन है जो उसके ग़मों में खुद को शरीक कर अपने को प्रेम के साथ ऐसे जोड लेता है जिसे अलग  नहीं किया जा सकता.     


संपर्क- २८, हालैंड हाल, इलाहाबाद  विश्वविद्यालय, इलाहाबाद          
मोबाइल-08004018007


उनके ग़मों में शरीक हो जाता हूँ 



कशिश भरी आवाज सुन कर
ठहर जाता हूँ
अपने साथ चलती परछाई से बिछड़ जाता हूँ
कहीं न कहीं वो आवाज 
दिलो दर्द को बयां करती 
जिन्हें सोच कर ठिठक जाता हूँ 

खूब याद वो आते हैं 
नज्मों में महक जाते हैं
तैरती हैं उनकी आहें 
हवा ओं के सतह पर 
संगीत के चादर में लिपटी हुई

ये बदकिस्मती थी मेरी 
की उन्हें देखा नहीं हमने 
पर उनके तरन्नुम को सुन 
भ्रमर बन मचल जाता हूँ 
अपने आप को भूल 
खुद उनके ग़मों में शरीक हो जाता हूँ 



बहती हुई एक नदी जैसी वह
  


ट्यूलिप सी अधखिली 
बहती हुई एक नदी जैसी वह
उसके    जिस्म पर
प्यार  की सलवटें बेहिसाब

यौवन  की राह  पर बढ़ चले यौवन
खिल रहे फूलों को 
चूमती पुरवाईयां

खूबसूरत  कुदरत की  
बेशकीमती वरदान है 
कहीं ठंडक की खिली धूप 
तो कहीं अदीब के कलमों की जान है  

   ***        ***       ***

टिप्पणियाँ

  1. इन कविताओं में एक स्पार्क है..हालाँकि भाषा को और कसना होगा....कवि को शुभकामनाएँ...

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  2. Subodh Shukla कवितायें अपने स्वर में ज़रुरत से ज्यादा चौकन्नी हैं इसलिए थीम असंगठित है. स्थापत्य प्रभावशाली है. बधाइयां............... !!!

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